आरा (भोजपुर)।* शहर की 400 साल पुरानी रामलीला समिति द्वारा आयोजित ऐतिहासिक रामलीला के तीसरे दिन कार्यक्रम का शुभारंभ सर्वप्रथम संस्था के सदस्यों एवं मुख्य अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। उसके बाद रावण-बाणासुर संवाद और धनुष यज्ञ का भव्य मंचन किया गया। काशी से आए कलाकारों ने इस प्रसंग का जीवंत मंचन किया, जिसे देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।कथा के अनुसार राजा जनक के सीता स्वयंवर में लंकापति रावण बिना आमंत्रण पहुंच जाता है। सभापति बाणासुर द्वारा परिचय पूछे जाने पर रावण क्रोधित हो जाता है और दोनों के बीच ओजस्वी संवाद शुरू होता है। अंत में रावण धनुष को छू भी नहीं पाता, तब गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पर श्रीराम धनुष भंग कर देते हैं और पूरा मैदान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठता है।
इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष सोनू राय, कार्यकारी अध्यक्ष संजीव गुप्ता, सचिव शंभू नाथ प्रसाद, वरीय उपाध्यक्ष दिलीप गुप्ता, उपाध्यक्ष अश्वनी कुमार, उपाध्यक्ष शंभू नाथ केसरी, कोषाध्यक्ष मदन प्रसाद एवं संरक्षक मंडल में रामकिंकर दास जी महाराज, हाकिम प्रसाद, रामेश्वर प्रसाद, संयोजक डॉ. विजय गुप्ता, सह-संयोजक राकेश रंजन पुतुल जी एवं सदस्यों में प्रमोद मुखिया, रितेश वर्मा, राजा तिवारी, पिंटू तिवारी, केदार प्रसाद गुप्ता, कृष्ण माधव अग्रवाल उर्फ टिंकू जी, मीडिया प्रभारी पंकज प्रभाकर सहित सैकड़ों सदस्य उपस्थित थे।